कोई एक, राम बनकर
रावण पर तीर ताने खडा हुआ...
निश्चित हुई जीत की भावना से
मन ही मन गर्व से चढा हुआ
रावण हँसा मन में, बोला,
रावण पर तीर ताने खडा हुआ...
निश्चित हुई जीत की भावना से
मन ही मन गर्व से चढा हुआ
रावण हँसा मन में, बोला,
‘गर पता होता की तुम
देव के भेस में छुपे दानव होगे,
वापस ले जाकर सीता को
फिर से वनवास भेज दोगे...
सीता को हरने का
विचार ही मन से निकाल देता
और मुझपर तीर चलाने का
हक़ भी मैं तुमसे छीन लेता...’
इतने में चला तीर और
लिपट गया रावण ज्वालाओं से
राम को सबने उठा लिया
और गढ़ दिया फूलों की मालाओं से
जलता हुआ रावण सोच में डूबा
देव के भेस में छुपे दानव होगे,
वापस ले जाकर सीता को
फिर से वनवास भेज दोगे...
सीता को हरने का
विचार ही मन से निकाल देता
और मुझपर तीर चलाने का
हक़ भी मैं तुमसे छीन लेता...’
इतने में चला तीर और
लिपट गया रावण ज्वालाओं से
राम को सबने उठा लिया
और गढ़ दिया फूलों की मालाओं से
जलता हुआ रावण सोच में डूबा
कौन झूठा है और कौन सच्चा है
ऐसे रामराज्य में रहने से तो
जल जाना अच्छा है...
ऐसे रामराज्य में रहने से तो
जल जाना अच्छा है |
ऐसे रामराज्य में रहने से तो
जल जाना अच्छा है...
ऐसे रामराज्य में रहने से तो
जल जाना अच्छा है |
- अभिजित भागवत